अधिकांश लोगों के दिमाग में कामकाजी महिला अर्थात "वर्किंग वूमन" शब्द सुनकर केवल ऑफ़िस वर्क करने वाली महिलाओं की छवि उभरती है, इसलिए अधिकांश लोग गृहणी महिलाओं अर्थात केवल घर के कार्य करने वाली महिलाओं की तुलना केवल ऑफ़िस वर्क करने वाली महिलाओं के साथ करते हैं।
मैंने दो-तीन दिन में "घरेलू महिला बनाम कामकाजी महिला" पर 20-22 पोस्ट पढ़े है। सभी पोस्ट में घरेलू महिलाओं की तुलना केवल ऑफ़िस वर्क करने वाली महिलाओं के साथ की गई है। इन सभी पोस्टकर्ताओं के अनुसार कामकाजी महिला का अर्थ केवल ऑफ़िस वर्क तक सीमित है।
असल में इन पोस्टकर्ताओं को केवल ऑफ़िस वर्क करने वाली महिलाओं से उलझना है। क्योंकि ऑफ़िस वर्क करने वाली अधिकांश महिलाएँ सोशल साइट्स का उपयोग करती है, इसलिए ऑफ़िस वर्क करने वाली महिलाएँ फुर्सत मिलने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करके इन पोस्टकर्ताओं को प्रसिद्ध कर सकती है।
भारत में बहुत सारी महिलाएँ मजदूरी भी करती है। सुबह घर से निकलती है और शाम तक कठोर परिश्रम करके घर लौटती है। इस तरह ढ़ेर सारी मजदूर महिलाएँ घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी में लगभग बराबर का आर्थिक सहयोग देती है। यहाँ इस बात पर ध्यान देना आवश्यक है कि ये मजदूर महिलाएँ दिनभर कठोर परिश्रम करने के बाद घर के कार्य भी करती है।
भारत में बहुत सारी महिलाएँ खेती-बाड़ी के काम भी करती है। सुबह घर से निकलती है और शाम तक कठोर परिश्रम करके घर लौटती है। ये किसान महिलाएँ भी घर आकर घर के कार्य भी करती है।
इसी प्रकार बहुत सारी महिलाएँ सिलाई कढ़ाई का कार्य करती है, ब्यूटी पार्लर का कार्य करती है, किरयाना की या मनिहारी की दुकान चलाती है, चाय-नाश्ते की दुकान चलाती है। हमारे राजस्थान में बहुत सी महिलाएँ पापड़, बड़ी, अचार इत्यादि बनाती है। बहुत सी महिलाएँ चुनरी बनाती है।
कुल मिलाकर कहने का तात्पर्य यह है कि ये सभी महिलाएँ कामकाजी महिलाओं की श्रेणी में आती है या कामकाज का अर्थ केवल ऑफ़िस वर्क तक सीमित हो गया है ?
अगर कामकाज का अर्थ केवल ऑफ़िस वर्क है, तो अधिकांश पुरुषों के कार्य का कोई महत्व ही नहीं रहेगा।
और अगर कामकाजी होने का अर्थ आर्थिक जिम्मेदारी में अपना योगदान देना है, तो निश्चित रूप से केवल घर के कार्य करने वाली महिलाओं की तुलना में कामकाजी महिलाएँ श्रेष्ठ है। सभी महिलाएँ अपनी योग्यता और क्षमता के अनुसार मजदूरी, खेती-बाड़ी, सिलाई-कढ़ाई, दुकानदारी, नौकरी इत्यादि करके अपने घर-परिवार में अपना आर्थिक योगदान देती है।
एक तरफ़ तो कहा जाता है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। और दूसरी तरफ़ ऑफ़िस वर्क के अतिरिक्त अन्य कार्य करने वाली महिलाओं को महत्व ही नहीं दिया जाता ?
अब आप विचार कीजिए कि मजदूरी से लेकर ऑफ़िस वर्क तक अपनी क्षमता और योग्यता के अनुसार धन कमाने वाली महिलाएँ श्रेष्ठ है या धन के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर महिलाएँ श्रेष्ठ है ?
अधिकांश पुरुषों को भी कामकाजी महिलाएँ ही श्रेष्ठ लगती है। जिन महिलाओं को केवल घर के कार्य ही आते है, उनके घर में आर्थिक संकट आने पर घर के लड़के या पुरुष असहाय और अकेलापन महसूस करते है। क्योंकि पत्नी या माता को तो घर के काम के अलावा कुछ आता ही नहीं है। पत्नी या माता में तो कोई योग्यता ही नहीं है।
यहाँ यह भी जानना आवश्यक है कि कामकाजी महिलाओं के घर में आवश्यकता पड़ने पर घर के कार्य पति या बेटे भी कर लेते हैं। माँ व्यस्त है, तो कपड़े-बर्तन बेटे या बेटी ने धो दिये। पत्नी व्यस्त है, तो भोजन पति ने बना दिया। ये सब साधारण घरों में सामान्य बात है।
भारत के साधारण घरों में अक्सर बच्चे के बीमार होने पर पत्नी मजदूरी करने या फैक्टरी वगैरह में काम करने चली जाती है और पति बच्चे को डॉक्टर के पास लेकर जाता है। पति खुद ही बोल देता है कि तुम चली जाओ, बच्चे को मैं दिखा लाऊँगा। यह सब पति-पत्नी की समझदारी और पति-पत्नी के आपसी तालमेल पर निर्भर करता है।
आजकल तो लड़के वाले रिश्ता करते समय लड़की वालों से पूछते भी है कि आपकी लड़की को घर के कामों के अलावा और क्या-क्या आता है ? और फिर वरीयता उसी लड़की को दी जाती है, जो घर के कामों के अलावा धन कमाने के कुछ कार्य भी जानती हो।
जहाँ तक बात ऑफ़िस वर्क करने वाली महिलाओं के घमंडी होने की है, तो इसका महिला-पुरुष से कोई संबंध नहीं है। सरकारी नौकरी मिलने के बाद या अत्यधिक धन कमाने वाले पुरुषों में भी घमंड आ जाता है। यह एक अलग विषय है।
जैसे सरकारी नौकरी करने वाले पुरुष मजदूरी करने वालों पुरुषों को अपने से छोटा मानते हैं, उसी प्रकार बड़े स्तर की नौकरी करने वाली महिलाएँ अन्य महिलाओं को अपने से कमतर समझने लगती है।
उदाहरण के लिए कुछ संपन्न घरों में महिला को केवल घर के काम भी पूरी तरह नहीं आते हो, वो महिला तब भी सभी घर के सभी कार्य करने में निपुण नौकरानी को तुच्छ ही समझती है। जबकि नौकरानी तो अपने घर में आर्थिक सहयोग करने वाली वर्किंग वूमन ही है।
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लेेेखक - वर्मन गढ़वाल