Sunday, May 9, 2021

स्वास्थ्य और चिकित्सा

अब से 15 वर्ष पहले तक भारत के साधारण और गरीब घरों की महिलाओं को माथे पर हाथ रखकर, कलाई पकड़कर नस जाँचने, सीने पर हाथ रखकर, पेट मसलकर, पेट को अलग-अलग तरह से दबाकर सामान्य सर्दी-जुकाम, सामान्य पेटदर्द, सामान्य सरदर्द, सामान्य सिर चकराने, सामान्य बुखार, सामान्य कमज़ोरी जैसे रोगों की गंभीरता जाँचने की समझ होती थी, इसलिए अनुभवी और जानकार महिलाएँ रोगी की जाँच करके बता देती थी कि रोगी घर पर ही घरेलू उपचार से स्वस्थ हो सकता है या फिर डॉक्टर के पास ले जाने की आवश्यकता है ?


इस तरह रोगी का घर पर ही स्वस्थ होना संभव होने पर महिलाएँ बीमारी की जाँच करके बीमारियों का निदान घर पर ही ढ़ेर सारे घरेलू उपचार से कर दिया करती थी। मुझे इन घरेलू उपचार के बारे में जानकारी तो नहीं है, लेकिन जब मैं छोटा था, तब हमारे आस-पड़ोस की ज्यादातर महिलाओं को इस प्रकार रोग की जाँच करना आता था और महिलाएँ अजवाइन, इसबगोल, पतासे, फिटकरी, लौकी का जूस, करेले का जूस, आम के पत्ते, पान के पत्ते, शहद, लौंग, जैसी ढ़ेर सारी चीज़ों से अलग-अलग बीमारी के लिए अलग-अलग घरेलू औषधि बनाकर रोगी को देती थी और किसी प्रकार की दवाईयों का सेवन किये बिना ही रोगी स्वस्थ हो जाते थे।


मेरी आयु सात-आठ वर्ष थी, तब की बात है। एक बार मेरे पेट में बहुत तेज दर्द हुआ। हमारे पड़ोस की एक महिला यू ही हमारे घर आयी। मेरी मम्मी ने उनको मेरे पेटदर्द के बारे में बताया। उन्होंने मेरे पेट को मसलकर, अलग-अलग तरह से दबा-दबाकर देखा और और अजवाइन वगैरह का कुछ बनाकर पानी के साथ पिलाने के लिए कहा। मेरी मम्मी ने उनके बताए अनुसार दो-चार चीज़ों से घरेलू औषधि बनाकर मुझे पिलाई और पाँच मिनट में ही मेरा पेटदर्द बिल्कुल ठीक हो गया। यहाँ इस बात का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है कि उन आन्टी ने कोई तुक्का नहीं मारा था। यदि मेरे पेटदर्द का उपचार घर पर संभव नहीं होता, तो वो डॉक्टर के पास ले जाने के लिए बोल देती। उन्होंने मेरा पेट मसलकर, दबा-दबाकर देखा, तो पाया कि मेरा पेटदर्द सामान्य है, इसीलिए उन्होंने वो घरेलू उपचार बताया।


पहले साधारण और गरीब घरों की बहुत सी महिलाओं को इस तरह रोग की जाँच करने और रोग के घरेलू उपचार की जानकारी होती थी, इसलिए पहले अधिकांश लोग सामान्य बीमारी होने पर घर पर ही घरेलू उपचार से स्वस्थ हो जाते थे और दवाईयों का सेवन कम से कम करते थे।


इसके अतिरिक्त पहले के साधारण और गरीब लोगों में बीमार होने पर नाड़ी वैद्य से ईलाज करवाने का चलन अधिक था। नाड़ी वैद्य भी रोगी के माथे पर हाथ रखकर, सीने पर हाथ रखकर, कलाई पकड़कर नस की जाँच करके, पेट मसलकर, पेट दबा-दबाकर इत्यादि तरीकों से ही रोगी की जाँच करके रोग का उपचार बताते हैं।


मेरे पिताजी को 15-16 वर्ष की आयु में टीबी हो गई थी और टीबी ठीक होने के बाद साँस की तकलीफ़ हो गई। अब से लगभग 20 वर्ष पहले की बात है। एक बार मेरे पिताजी बहुत अधिक बीमार हुए। मेरे पिताजी के एक परिचित ने एक नाड़ी वैद्य को दिखाने का सुझाव दिया। उन वैद्य जी ने मेरे पिताजी की जाँच करके पिताजी को फिटकरी गर्म करके चूरा बनाकर शहद के साथ चाटने के लिए कहा और एक-दो कुछ और चीज़ों का सेवन करने के लिए कहा था। मैं उस समय बच्चा ही था, इसलिए मुझे ठीक से सब कुछ याद नहीं है, लेकिन इससे मेरे पिताजी स्वस्थ हो गये थे और अगले चार-पाँच वर्ष तक उनको स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी नहीं हुई। इस प्रकार मेरे पिताजी ने अपने जीवन में कभी नाड़ी वैद्य, कभी होम्योपैथी, कभी एलोपैथी सभी तरह के उपचार लिए और 65 वर्ष तक जीवन जीया।


इसी तरह जब मेरी आयु 14 वर्ष थी, तब मेरी मम्मी के गले में कुछ प्रोब्लम हुई, जिससे मेरी मम्मी कुछ भी खाती थी, तो खाना गले में ही फँस जाता था और साँस रूक जाता था। मेरी मम्मी को हनुमानगढ़ और बीकानेर दिखाया, लेकिन सभी डॉक्टर्स ने जवाब दे दिया।


मेरी मम्मी बीमार होने से पहले हेल्थी शरीर की थी, लेकिन बीमार होने के बाद केवल एक-डेढ़ महीने में बिल्कुल हड्डियों का ढांचा बन गई और उनकी हड्डियाँ दिखने लगी थी।


मेरे पिताजी भी चिंतित रहने लगे कि पत्नी मरने वाली है। मैं भी बीमार रहता हूँ। मेरा भी कोई भरोसा नहीं है। बच्चे अभी छोटे हैं। इस दौरान मेरे पिताजी के एक मित्र ने मेरी मम्मी को एक नाड़ी वैद्य को दिखाने के लिए कहा।


उन वैद्य जी ने मेरी मम्मी की रिपोर्ट वगैरह देखकर कहा कि 250 ग्राम दही में 25 ग्राम तुलसी के पत्ते पीसकर सुबह-शाम लो। इससे फायदा हो सकता है। मेरी मम्मी तीन-चार महीने में काफ़ी हद तक ठीक हो गई और अभी तक जीवित है।


यहाँ इस बात का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है कि वो वैद्य जी रोगी की जाँच करके रोगी का उपचार संभव होने पर ही कोई उपचार बताते थे। अगर किसी रोग का उपचार एलोपैथी डॉक्टर के पास होता था, तो एलोपैथी डॉक्टर के पास जाने का सुझाव देते थे। अगर किसी रोग का उपचार होम्योपैथिक डॉक्टर के पास होता था, तो होम्योपैथिक डॉक्टर के पास जाने का सुझाव देते थे।


आजकल रोग की जाँच करके सामान्य बीमारियों को घरेलू उपचार से ठीक करने वाली महिलाएँ तो लगभग विलुप्त ही हो गई है और जो थोड़ी-बहुत बुजुर्ग महिलाएँ घरेलू उपचार से सामान्य बीमारियों को ठीक करना जानती हैं, उनकी कोई सुनता नहीं है। नाड़ी वैद्य से ईलाज करवाने का चलन भी लगभग समाप्त हो गया है।


आजकल संपन्न और साधारण घरों के लोग बुखार जाँचने, ब्लड प्रेशर जाँचने, ऑक्सीजन लेवल जाँचने, हृदय की धड़कनें जाँचने इत्यादि के उपकरण घर पर ही रखते हैं, इसलिए अब तो बीमार होने पर शरीर की जाँच करके सामान्य बीमारियों का घरेलू उपचार सरल होना चाहिए और दवाईयों का सेवन पहले की तुलना में कम होना चाहिए, लेकिन आश्चर्य की बात है कि दवाईयों का सेवन पहले की तुलना में बहुत अधिक हो गया है। इस तरह दवाईयों का अनावश्यक और अत्यधिक सेवन करने से अधिकांश लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अर्थात इम्यूनिटी कमज़ोर हो रही है।


यहाँ मेरे कहने का तात्पर्य दवाईयों का सेवन समाप्त करना नहीं है, लेकिन दवाईयों का सेवन केवल आवश्यकता होने पर ही करना चाहिए। जब हमारे पास रोग को ठीक करने के लिए दवाईयों के अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं हो, केवल तभी दवाईयों का सेवन करना चाहिए। क्योंकि दवाईयों का सेवन करने पर हमारे शरीर के जीवाणु मरने से हमें आराम तो तुरन्त मिलता है, लेकिन इस तरह तुरन्त आराम प्राप्त करने में हमारे शरीर के हानिकारक जीवाणुओं के साथ-साथ लाभदायक जीवाणु भी मारे जाते हैं।


हमारे शरीर के भीतर करोड़ों-अरबों की संख्या में अनगिनत जीवाणु होते हैं। इनमें से कुछ जीवाणु हमारे लिए हानिकारक होते हैं, कुछ जीवाणु हमारे लिए लाभदायक होते हैं और कुछ जीवाणु शरीर की भीतरी स्थिति के अनुसार व्यवहार करते हैं अर्थात जब हमारे शरीर के भीतर की स्थिति उन जीवाणुओं के विपरीत होती है, तब वो जीवाणु हमें हानि पहुँचाने लगते हैं और जब हमारे शरीर के भीतर की स्थिति उन जीवाणुओं के अनुकूल होती है, तब वो जीवाणु हमें लाभ पहुँचाने लगते हैं।


उदाहरण के लिए सर्दी के मौसम में ठंडी चीजें खाने से हम बीमार होते हैं, लेकिन गर्मी के मौसम में ठंडी चीजें खाना हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। हमारे बीमार होने पर डॉक्टर्स कभी खट्टी चीज़ों का सेवन अधिक करने के लिए कहते हैं और कभी स्वस्थ होने तक खट्टी चीज़ों का सेवन करने से रोक देते हैं। डॉक्टर्स इस तरह के निर्देश हमारे शरीर की भीतरी स्थिति जीवाणुओं के अनुकूल बनाने के लिए ही देते हैं।


हमारे शरीर के लिए लाभदायक जीवाणुओं को मारना तो हमारे लिए ही हानिकारक है और जो जीवाणु केवल विपरीत स्थिति में हमें हानि पहुँचाते हैं, उनको मारने की बजाय उनके लिए अनुकूल स्थिति तैयार करना अधिक उपयुक्त है। क्योंकि अनुकूल स्थिति होने पर हमारे लिए हानिकारक जीवाणुओं को वो स्वयं ही बड़ी सरलता से समाप्त कर देते हैं। इसी आधार पर वैद्य ईलाज करते हैं और घरेलू उपचार से सामान्य रोग ठीक होते हैं।


हमें हमारे शरीर के केवल उन्हीं जीवाणुओं को मारना होता है, जो हमें हर स्थिति में हमेशा हानि ही पहुँचाते हैं, लेकिन दवाईयों का सेवन करने पर सभी तरह के जीवाणु मारे जाते हैं और हानिकारक जीवाणुओं के साथ-साथ लाभदायक जीवाणु भी कम हो जाते हैं। फिर जब अगली बार किसी कारण हानिकारक जीवाणुओं की संख्या बढ़ती है, तब हमारे शरीर में हानिकारक जीवाणुओं से लड़ने के लिए पर्याप्त संख्या में लाभदायक जीवाणु नहीं होते और हमें स्वस्थ होने में कठिनाई होती है। इस तरह अनावश्यक रूप से दवाईयों का अत्यधिक सेवन करने के कारण हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता अर्थात इम्यूनिटी कम हो जाती है और हम बार-बार बीमार होने लगते हैं।


यहाँ जीवाणुओं के बारे में यह जान लेना भी आवश्यक है कि जीवाणु कभी-भी मरते नहीं है। जीवाणु केवल प्रतिकूल स्थिति या प्रतिकूल वातावरण होने पर निष्क्रिय होते हैं और अनुकूल स्थिति या अनुकूल वातावरण मिलने पर सक्रिय होते हैं। इसके अतिरिक्त स्थिति और वातावरण के अनुसार जीवाणु अपना रूप बदलते हैं, जीवाणु अपनी क्षमता बदलते हैं, जीवाणु अपना व्यवहार बदलते हैं, जीवाणु अपना स्वभाव बदलते हैं और जीवाणु को अपने गुणों के आधार पर जीन, सूक्ष्म जीव, विषाणु, बैक्टीरिया, वायरस इत्यादि भी कहते हैं।


अभी का कोरोना वायरस भी एक जीवाणु है। कोरोना वायरस भी कभी नहीं मरेगा। क्योंकि अभी तक ऐसी कोई तकनीक नहीं है, जिससे किसी वायरस को समाप्त किया जा सकें। कोरोना वायरस को निष्क्रिय किया जा सकता है, कोरोना वायरस का रूप बदला जा सकता है, कोरोना वायरस की क्षमता में बदलाव किया जा सकता है, कोरोना वायरस का व्यवहार बदला जा सकता है, कोरोना वायरस का स्वभाव बदला जा सकता है। ये सब स्थिति और वातावरण के अनुसार कोरोना वायरस स्वयं भी कर सकता है, लेकिन कोरोना वायरस का समाप्त होना या कोरोना वायरस को समाप्त करना असंभव है।


भारतीय वैक्सीन असल में निष्क्रिय किये हुए कोरोना वायरस ही है। पागल कुत्ते के काटने पर जो रेबीज के टीके लगाए जाते हैं, वो रेबीज के टीके असल में रेबीज के ही निष्क्रिय वायरस होते हैं। वायरस निष्क्रिय होने के बाद किसी भी तरह से लाभ पहुँचाने या हानि पहुँचाने में असमर्थ हो जाते हैं।


दुनिया के अन्य देशों के लोगों का मालूम नहीं, लेकिन भारत के साधारण लोगों को जीवाणुओं के बारे में जानकारी नहीं होती या जानकारी बहुत कम होती है, लेकिन फिर भी अधिकांश पुराने लोग इतना तो जानते ही है कि दही खाने से क्या लाभ है ? कौनसे फल खाने से क्या लाभ है ? कौनसे फल कब खाने चाहिए और कब नहीं खाने चाहिए ?


उदाहरण के लिए कुछ बीमारियों में तली हुई चीज़े खाने से रोका जाता है, कुछ बीमारियों में खट्टी चीज़ों का सेवन नहीं करने से रोका जाता है, कुछ फल केवल अपने मौसम में ही लाभदायक होते है, कभी ठंडी चीज़ों का सेवन हानिकारक होता है, कभी ठंडी चीज़ों का सेवन लाभदायक होता है, कभी गर्म चीजों का सेवन हानिकारक होता है, कभी गर्म चीजों का सेवन लाभदायक होता है।


इस तरह पहले के साधारण लोग शरीर की अलग-अलग अवस्था में खान-पान का शरीर के ऊपर प्रभाव देखकर अनुमान लगा लेते थे कि स्वस्थ रहने और बीमारियों से बचने के लिए क्या करना चाहिए ? और किसी व्यक्ति के बीमार होने पर व्यक्ति के रोग की जाँच करके सामान्य बीमारियों का ईलाज घरेलू उपचार से कर दिया करते थे।


आजकल अधिकांश लोग बच्चों को या खुद को जरा-सी सर्दी-जुकाम होते ही तुरंत अस्पताल या मेडिकल स्टोर पर भागते हैं। आजकल अधिकांश घरों में सर्दी-जुकाम, बुखार, सिरदर्द, बदनदर्द, पेटदर्द, सिर चकराने इत्यादि की दवाईयाँ हमेशा उपलब्ध रहती है। केवल एक कप लौंग, इलायची, अदरक वगैरह डालकर बनाई हुई अच्छी-सी चाय पीने से ठीक होने वाली सर्दी-जुकाम के लिए भी अधिकांश लोग दवाई का सेवन करते हैं। केवल दो-चार घंटे आराम करने से ठीक होने वाले सिरदर्द या सिर चकराने की समस्या के लिए अधिकांश लोग दवाई का सेवन करके आराम करते हैं। असल में थकान या धूप वगैरह में घूमने के कारण होने वाला सिरदर्द या सिर चकराने की समस्या दवाई का सेवन किये बिना आराम करने से या कुछ ठंडा नींबू पानी, जूस वगैरह पीकर आराम करने से भी ठीक हो सकता है, लेकिन फिर भी अधिकांश लोग जान-बूझकर खुद को दवाईयों पर आश्रित कर रहे हैं।


अभी दुनियाभर के लोग कोरोना वायरस के कारण परेशान है। इस बार सबसे अधिक प्रभावित भारत ही है। कोरोना से संक्रमित होने वाले लोग तो परेशान है ही, लेकिन अन्य बीमारियों से पीड़ित लोग भी बहुत परेशानी झेल रहे हैं। इन परेशानी झेलने वालों में एक बड़ी संख्या सामान्य बीमारियों से परेशान लोगों की है। क्योंकि अधिकांश लोग बीमारी की जाँच करके सामान्य बीमारियों का घरेलू उपचार करना जानते नहीं है और किसी के घर में पुराने जानकार और अनुभवी लोग सामान्य बीमारियों के घरेलू उपचार करना जानते भी है, तो आजकल के लोगों ने अपने और अपने बच्चों के शरीर को दवाईयों पर आश्रित कर रखा है, इसलिए आजकल के लोग और बच्चे घरेलू उपचार से स्वस्थ होने में सक्षम नहीं है।


इस कोरोना काल में घरेलू उपचार से ठीक होने वाली सामान्य सर्दी-जुकाम, सामान्य सरदर्द, सामान्य सिर चकराने, सामान्य बुखार, सामान्य पेटदर्द इत्यादि जैसे रोगों की दवाईयाँ उपलब्ध नहीं होने या मँहगी मिलने के कारण दवाईयों के अभाव में ये सामान्य रोग कुछ समय बाद बड़े रोग बनकर लोगों को परेशान कर रहे हैं। इसका प्रमुख कारण अधिकांश लोगों का छोटी से छोटी समस्या के लिए दवाईयों पर आश्रित होना है।


हमें दवाईयों का अनावश्यक और अत्यधिक सेवन बन्द करके अपने शरीर को दवाईयों पर आश्रित होने से बचाने के लिए घरेलू उपचार की जानकार महिलाओं से, अच्छे और प्रशिक्षित वैद्यों से रोग की गंभीरता जाँचना और सामान्य रोग के घरेलू उपचार करना सीखने की आवश्यकता है। हमारा दिमाग और शरीर दैनिक जीवन के खान-पान की चीज़ों का आदि होता है, इसलिए अपने दैनिक जीवन के खान-पान से स्वस्थ होना भी सरल होता है और हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता अर्थात इम्यूनिटी भी बढ़ती है। इसलिए सामान्य बीमारियों का ईलाज घरेलू उपचार से ही करना चाहिए और घरेलू उपचार से स्वस्थ होना संभव नहीं होने पर ही किसी प्रशिक्षित और योग्य डॉक्टर से अपना ईलाज करवाना चाहिए।


सभी तरह की चिकित्सा पद्धति के प्रशिक्षित और योग्य डॉक्टर्स, प्रशिक्षित और योग्य वैद्य और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े प्रशिक्षित और योग्य लोगों को इन तथ्यों के बारे में पूर्ण जानकारी होती है, इसलिए प्रशिक्षित और योग्य डॉक्टर्स, वैद्य और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग कभी-भी यह दावा नहीं करेंगे कि हर बीमारी का ईलाज केवल एक ही चिकित्सा पद्धति में है या किसी एक चिकित्सा पद्धति से सभी बीमारियों का ईलाज किया जा सकता है। हर व्यक्ति का ईलाज व्यक्ति की आयु, व्यक्ति के Gender, व्यक्ति की मानसिक स्थिति, व्यक्ति की शारीरिक स्थिति इत्यादि के अनुसार होता है।


यहाँ मेरे शब्दों "प्रशिक्षित और योग्य" पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। हम बीमार होने पर किसी भी चिकित्सा पद्धति के डॉक्टर, वैद्य या चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े किसी अन्य व्यक्ति से अपना ईलाज करवाए, लेकिन उन डॉक्टर, वैद्य या चिकित्सा क्षेत्र के व्यक्ति का प्रशिक्षित और योग्य होना सबसे अधिक आवश्यक है।


अब उन डॉक्टर, वैद्य या चिकित्सा क्षेत्र के व्यक्ति के "प्रशिक्षित और योग्य" होने का आंकलन कैसे और किस आधार पर करना है ? यह हमारे विवेक पर निर्भर करता है। क्योंकि स्वयं को प्रशिक्षित प्रमाणित करने के लिए डिग्री तो लगभग सभी के पास होती है और कोई भी डॉक्टर, वैद्य या चिकित्सा क्षेत्र का व्यक्ति खुद को अयोग्य नहीं कहेगा।


दुनिया के बुद्धिमान से बुद्धिमान लोग भी किसी व्यक्ति के प्रशिक्षित और योग्य होने का आंकलन करना नहीं सीखा सकते। क्योंकि कोई भी बात हमेशा सही या हमेशा गलत नहीं होती और कोई भी बात सभी के ऊपर समान रूप से लागू नहीं होती। इसलिए किसी के प्रशिक्षित और योग्य होने का आंकलन केवल और केवल स्वयं के विवेक से ही किया जा सकता है।


अपने लिए डॉक्टर का चयन करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि डॉक्टर के प्रशिक्षित और योग्य होने का आंकलन डॉक्टर की आयु, डॉक्टर की डिग्रियों और डॉक्टर के बड़े नाम के आधार पर नहीं करना चाहिए। क्योंकि बहुत से डॉक्टर जनसेवा के उद्देश्य से लोगों का ईलाज करके ईमानदारी से धन कमाते हैं और बहुत से डॉक्टर अनुचित तरीके से धन कमाने के लिए गर्भवती महिलाओं के साधारण डिलीवरी केस में भी ऑपरेशन करवाने को बोल देते हैं। बहुत से युवा डॉक्टर धन कमाने की ओर कम ध्यान देते हैं और लोगों को स्वस्थ करने की ओर अधिक ध्यान देते हैं, इसके विपरीत बहुत से 50-60 वर्ष से अधिक आयु वाले डॉक्टर केवल धन कमाने पर ही अधिक ध्यान देते हैं। इसलिए कभी-भी डॉक्टर की आयु, डॉक्टर की डिग्रियों और डॉक्टर के बड़े नाम के आधार पर डॉक्टर के प्रशिक्षित और योग्य होने का आंकलन नहीं करना चाहिए।


कोई भी अच्छा और योग्य डॉक्टर हमें दवाईयों का अनावश्यक और अत्यधिक सेवन करने के सुझाव कभी नहीं देगा। सभी अच्छे प्रशिक्षित और योग्य डॉक्टर्स दवाईयों का अनावश्यक और अत्यधिक सेवन करने से रोकते ही हैं, ताकि हमारे शरीर के भीतर हमारे लिए लाभदायक जीवाणुओं की संख्या अधिक से अधिक हो और हम कम से कम बीमार हो। और अगर बीमार हो भी जाए, तो हमें दवाईयों का सेवन कम से कम करना पड़े। सभी अच्छे प्रशिक्षित और योग्य डॉक्टर्स यहीं चाहते हैं।

..............................#Varman_Garhwal

09-05-2021, #वर्मन_गढ़वाल

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