Tuesday, October 9, 2018

भारतीय नारी की प्रेम दशा

भारतीय नारी प्रेम पाने के लिए प्रयोग के नाम पर अपनी देह पुरुषों को उपलब्ध करवाने के बाद केवल दिल बहलाने वाले साधारण खिलौने के समान बन जाती है, जिसका अतीत जानकर केवल पुरुष ही फैसला करते हैं, कि इस खिलौने के साथ कुछ समय खेलना है या दूसरों को इसके साथ खेलने से रोकना है ?

भारतीय नारी जब तक प्रेम की चाहत में प्रयोग के नाम पर अपनी देह से पुरुषों का दिल बहलाना नहीं छोड़ेगी, तब तक भारतीय नारी मानसिक रूप से पुरुषों की गुलाम ही रहेंगी और गुलाम के साथ कैसा व्यवहार होता है ? यह गुलाम के मालिकों पर निर्भर करता है। गुलाम केवल अपने मालिक बदल सकते हैं, लेकिन रहते वो गुलाम ही है। इसी तरह भारतीय नारी बुरा व्यवहार या अपमान होने पर केवल पुरुष बदल सकती है, लेकिन रहती वो पुरुष की गुलाम ही है। बुरा पुरुष बुरे मालिक की तरह बुरा व्यवहार करता है और अच्छा पुरुष अच्छे मालिक की तरह अच्छा व्यवहार करता है।

भारतीय नारी यदि इस मानसिक गुलामी से मुक्ति पाकर सम्मान पाना चाहती है, तो सबसे पहले इस मानसिकता को समझना होगा कि पुरुष स्वयं चाहे कैसा भी हो, लेकिन पुरुष को पत्नी पवित्र चाहिए। सरल शब्दों में कहें, तो वर्जन लड़की अर्थात शुद्ध कुँवारी कन्या। कुछ पुरुष पहले से शारीरिक संबंध बना चुकी नारी को सहजता से स्वीकार करते हैं, लेकिन उन पुरुषों की मानसिकता यहीं होती है, कि उन्होंने ऐसी नारी के साथ सम्मानित रिश्ता जोड़कर नारी का जीवन सँवारकर नारी पर एहसान किया है। भारतीय पुरुषों की यह मानसिकता बदलें बिना भारतीय पुरुषों से नारी-सम्मान की आशा करना गलतफ़हमी पालने जैसा है।

अगर भारतीय नारी अपनी देह प्रस्तुत करने से पहले पुरुषों के सामने उनकी पवित्रता की शर्त रखना शुरू कर दें, तो भारतीय नारी को प्रेम पाने के लिए अपनी देह प्रस्तुत करने की आवश्यकता ही नहीं रहेंगी। और जब प्रेम मिलता है, तो सम्मान अपनेआप मिल जाता है। क्योंकि देह की चाहत रखने वाले देह पाने के लिए केवल प्रेम का सहारा लेते हैं, वास्तव में उन्हें प्रेम होता नहीं है। इसलिए देह पाने के बाद वो बदल जाते हैं। लेकिन जिन्हें प्रेम होता है, उनके लिए आपका सम्मान ही सर्वोपरि होता है।

हम अक्सर लड़कियों और महिलाओं से सुनते हैं कि लड़के सिर्फ जिस्म की खूबसूरती से प्यार करते हैं, पुरुष केवल शारीरिक सुन्दरता से प्रेम करते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि लड़के और पुरुष ये अच्छी तरह जानते हैं कि नारी प्रेम पाने के लिए आसानी से अपना शरीर उपलब्ध करवा देती है।

भारतीय नारी द्वारा किसी पुरुष को अपनी देह केवल तभी उपलब्ध करवानी चाहिए, जब उस पुरुष से शारीरिक सुख पाने की इच्छा हो और वो भी अपनी शर्तों पर उपलब्ध करवानी चाहिए। इससे पुरुष केवल तभी नारी को प्रेम देंगे, जब उनके मन में नारी के लिए प्रेम होगा। अगर उनके मन में शारीरिक सुख पाने की इच्छा होगी, तो प्रेम का दिखावा किये बिना सीधे शारीरिक संबंध बनाने की बात करेंगे। क्योंकि जब नारी प्रेम के लिए शरीर उपलब्ध नहीं करवाएगी, तो नारी का शरीर पाने के लिए प्रेम करने का कोई औचित्य ही नहीं रहेगा और शारीरिक सुख के लिए प्रेम के नाम पर होने वाली धोखेबाजी समाप्त हो जाएँगी।

प्राचीन समय में नारी पुरुषों के अधीन थी, इसलिए नारी को पुरुषों द्वारा बनाए रीति-रिवाज और मान-मर्यादा के नियम-कायदों के अनुसार ही चलना पड़ता था। दुनिया के सभी धर्म-मज़हब, साहित्य, संविधान और कानून में नारी के लिए अभी तक जो भी लिखा, पढ़ा, बताया और समझाया गया है, वो सब समय और परिस्थिति के अनुसार पुरुषों द्वारा ही लिखा, पढ़ा, बताया और समझाया गया है। जो थोड़ा-बहुत महिलाओं ने लिखा, पढ़ा, बताया और समझाया है, वो सब भी पुरुषों से प्रभावित होकर ही लिखा, पढ़ा, बताया और समझाया है।

यहाँ कहने का अभिप्राय यह नहीं है कि प्राचीन समय में सब गलत ही था। प्राचीन समय की कुछ बातें समय और परिस्थिति के अनुसार बदलनी चाहिए। कुछ बातें स्वार्थी और चालाक पुरुषों द्वारा मनमाने तरीके से बदलने के कारण मानने योग्य नहीं है। पहले नारी को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता नहीं थी, इसलिए पुरुषों द्वारा मान-मर्यादा और तहज़ीब के नाम पर अपने मनमाने विचार नारी पर थोप दिये जाते थे। लेकिन अब समय बदल चुका है। अब नारी अपने विचारों के अनुसार जीवन जीने के लिए स्वतंत्र है।

अतः जिस प्रकार पुरुषों ने नारियों के लिए पवित्रता के मापदंड बना रखे हैं और उन्हीं के आधार पर नारी का चयन करते हैं। उसी प्रकार नारियों को भी पुरुषों के लिए पवित्रता के मापदंड बनाने चाहिए और उन्हीं पवित्रता के मापदंडों के आधार पर पुरुष का चयन करना चाहिए।

प्राचीन समय में नारी द्वारा पुरुषों की पवित्रता के मापदंड तय करना संभव नहीं था, लेकिन अब यह संभव है। फिर भी भारतीय नारी इसका लाभ उठाने की बजाय कपड़े, सिगरेट-शराब और सिन्दूर-बिंदी में उलझी हुई है। ये व्यर्थ की बातें छोड़कर आधुनिक भारत की शिक्षित और सक्षम नारियों को विशेषकर युवा लड़कियों को इस स्वतंत्रता का लाभ उठाकर अपनी बुद्धि और अपने विवेक का प्रयोग करके सोच-समझकर सही-गलत और अच्छे-बुरे पर विचार करके अपनी स्वयं की विचारधारा बनानी चाहिए।
..............................#Varman_Garhwal
09-10-2018, #वर्मन_गढ़वाल
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