सारे रिश्तों में दोस्ती सबसे सुविधाजनक रिश्ता है। दोस्ती करना भी बहुत आसान है और दोस्ती तोड़ना भी बहुत आसान है। गर्लफ्रैंड-बॉयफ ्रैंड के रिश्ते में भी केवल अलग होने के कारण बेवफा और धोखेबाज जैसे आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन दोस्ती में ऐसे आरोप कोई बड़ा धोखा होने के बाद ही लगाए जा सकते हैं। दोस्ती के साधारण झगड़ों का तो कोई महत्व ही नहीं है। दोस्त आपस में एक-दूसरे को कितना समझते हैं। एक-दूसरे के जीवन में दोनों का क्या महत्व है ? यह सब केवल दोस्तों पर ही निर्भर करता है।
अगर दोस्ती एक लड़के और एक लड़की के बीच हो, तब तो बंटाधार ही समझो। एक लड़का जितना अधिकार अपने लड़के दोस्त पर जता सकता है और एक लड़की जितना अधिकार अपनी सहैली पर जता सकती है, उतना अधिकार लड़का-लड़की केवल गर्लफ्रैंड-बॉयफ ्रैंड या शादी करके पति-पत्नी बनकर ही एक-दूसरे पर जता पाते हैं। केवल दोस्ती में उनकी बात और भावनाओं का कोई महत्व ही नहीं है।
लड़के-लड़की की दोस्ती में लड़के की भावनाओं का अचार बनना तय होता है। इसलिए समझदार लड़के लड़की से दोस्ती करते ही नहीं है। समझदार लड़कों की दोस्ती का मकसद ही यहीं होता है, कि पहले दोस्ती करो, फिर गर्लफ्रैंड बनाओ। क्योंकि लड़की के पास दोस्त के लिए रटा-रटाये जवाब हमेशा तैयार रहते हैं।
"हम सिर्फ दोस्त है, ओके।"
"बॉयफ्रैंड बनने की कोशिश मत करो, समझे।"
"हे भगवान! तुम मेरे बारे में इतना क्यों सोचते हो ?"
"ओ माइ गॉड ! तुम दोस्त हो, दोस्त बनकर रहो।"
"हाय अल्लाह ! तुम ये क्यों भूल जाते हो, वो मेरा बॉयफ्रैंड है ?"
ये केवल कुछ नमूने है। लड़के-लड़की के दोस्ती में इस तरह के और इससे मिलते-जुलते कई डायलॉग लड़कों को लड़कियों से सुनने को मिलते हैं।
लड़की यह विचार नहीं करती कि दोस्त की बात सही है या गलत ? अच्छी है या बुरी ? दोस्त भला सोच रहा है या बुरा ? दोस्त का भी बात करने का, मिलने-जुलने का मन होता है ? लेकिन नहीं। लडकी की जीवन में बॉयफ्रैंड आने के बाद दोस्त, दोस्त की बातें और दोस्त की भावनाएँ सब गई भाड़ में। लड़की का सब कुछ उसका बॉयफ्रैंड हो जाता है।
यहाँ कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि सभी लड़के दुध के धुले हुए है। यह सही है कि कुछ लड़के गलत इरादे से लड़कियों के साथ दोस्ती करते हैं, लेकिन जिनके मन में कोई गलत इरादा नहीं होता, जो हमेशा आपकी खुशी के बारे में सोचते हैं। कभी आप भी उनके बारे में सोच लिया करो।
यकिन मानिए, जो लड़के सच्चे दिल से दोस्ती करते हैं, वो किसी को आपसे दूर नहीं करना चाहते। उनको आपके बॉयफ्रैंड या आपके पति से कोई प्रोब्लम नहीं है। आपको परेशान या उदास देखकर वो मायूस हो जाते हैं। आपको खुश होकर हँसते-मुस्कुरात े हुए देखकर वो खुश होते हैं। वो दोस्ती टूटने पर भी बॉयफ्रैंड की तरह आप पर आरोप नहीं लगाएंगे। लेकिन हाँ, दिल उनका भी दुखता है। चोट उनको भी लगती है। ये बात अलग है, कि बॉयफ्रैंड की तरह वो अपना दर्द जाहिर नहीं कर पाते। कुछ दोस्त करते भी है, तो लोग गलत अर्थ निकालते हैं। वो प्यार तो बहुत करते हैं, लेकिन उनके प्यार में आपकी खुशी के सिवा कुछ हासिल करने का स्वार्थ नहीं है। लड़की को अपनी सच्ची दोस्त बनाने वाले लड़के बहुत कम है, लेकिन जो है, वो लाजवाब है।
हाँ, लड़की से दोस्ती निभाते वहीं है, जिनके दिल और दिमाग में गन्दगी नहीं होती। लेकिन ये बात तो बॉयफ्रैंड और पति पर भी लागू होती है। जिनके इरादे गलत है, वो चाहे कोई भी रिश्ता बनाए, उनसे आपको तकलीफ ही मिलेगी।
अक्सर लड़कियाँ शादी होते ही सबसे पहले अपने लड़के दोस्तों को खुद से दूर करती है। लड़कियाँ ये भी नहीं सोचती, कि इससे उन दोस्तों के दिल पर क्या गुजरती है ? बॉयफ्रैंड लोग तो लड़की का चेहरा खराब करके या लड़की का मर्डर करके अपना प्यार दिखा देते हैं। क्योंकि बॉयफ्रैंड का मकसद आपकी खुशी नहीं, बल्कि खुद की खुशी होता है। बॉयफ्रैंड के लिए शादी के बाद भी कई लड़कियाँ रोती है। बॉयफ्रैंड के रिश्ते में फिजिकल रिलेशन की भावना भी होती है। इसलिए बॉयफ्रैंड का रिश्ता पति से छुपाना जरूरी है, लेकिन दोस्त का प्यार तो फिजिकल रिलेशन से बढ़कर होता है। फिर भी शादी होते ही सबसे पहले दोस्त को जीवन से बाहर करके दोस्त का दिल तोड़ दिया जाता है।
अगर लड़की ने किसी अच्छे इन्सान को दोस्त बनाया है, जिसके दिल में फिजिकल रिलेशन जैसी कोई भावना नही है। जो केवल लड़की की खुशी के बारे में सोचता है। उसे पति से छुपाने की क्या जरूरत है ? जो पति एक पुरुष होकर अपनी पत्नी के अच्छे पुरुष दोस्तों की भावनाओं को पहचान ना सकें, वो पत्नी की भावनाओं को कैसे समझेगा ? क्योंकि जो पत्नी धोखा देना चाहती है, वो अपने दोस्त को पति से क्यों मिलवाएगी ? और जिसके मन में खोट है, वो लड़की के पति से क्यों मिलेगा ? हाँ, कई लोग गलत इरादों से दोस्त बनते हैं, लेकिन पति-पत्नी में इतनी समझ तो होनी चाहिए कि वो अच्छे दोस्त और बुरे दोस्त की पहचान कर सकें। क्योंकि धोखा तो पति के दोस्त भी दे सकते हैं।
और हाँ,
और एक बात,
दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है, जिसे किसी भी रिश्ते में कन्वर्ट किया जा सकता है। नारी-पुरुष की मित्रता में आयु का अधिक अन्तर होने पर दोस्त माँ-बेटा या माँ-बेटी भी बन सकते हैं, बाप-बेटा या बाप-बेटी भी बन सकते हैं। जैसे समान आयु के दो दोस्त एक-दूसरे को भाई कह सकते हैं, दो सहैलियाँ एक-दूसरे को बहन कह सकती है, उसी तरह लड़का-लड़की दोस्ती में एक-दूसरे को भाई-बहन भी कह सकते हैं। वो कहें या ना कहें ? ये उनकी भावनाओं और इच्छा पर निर्भर करता है। लेकिन कोई यह सुनते ही असहज हो जाए, तो समझ जाओ, उसका असली इरादा दोस्ती की आड़ में कुछ और है। दोस्त एक-दूसरे को क्या कहते हैं ? यह उनकी आपसी सहमति की बात है, लेकिन जो सच्चे मन से दोस्ती करते हैं, वो हर बात में सहज रहते हैं।
दोस्ती के बाद गर्लफ्रैंड-बॉयफ ्रैंड बनने या शादी करके पति-पत्नी बनने की इच्छा जागृत होना अलग बात हैं, लेकिन पहले से इस तरह की सोच लेकर प्लानिंग से दोस्ती करना चालाकी है। इस बात को समझने की जरूरत है।
अतः दोस्त बनकर अपना स्वार्थ साधने वालों से बचकर रहिए और अपनी बुद्धि व विवेक से सोच-समझकर अच्छे लोगों से दोस्ती कीजिए। और दोस्ती करने के बाद दोस्त की भावनाओं का सम्मान भी कीजिए। किसी भी अच्छे दोस्त को बिना उचित कारण खुद से दूर ना करें। जो आपको सच्चे दिल से दोस्त मानते हैं, यदि उनके कारण आपको कोई प्रोब्लम होने की संभावना रहती है, तो सच्चे दोस्त खुद ही आपसे दूर हो जाएंगे। क्योंकि आपकी भलाई में ही सच्चे दोस्तों की खुशी होती है।
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06-10-2018, #वर्मन_गढ़वाल
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अगर दोस्ती एक लड़के और एक लड़की के बीच हो, तब तो बंटाधार ही समझो। एक लड़का जितना अधिकार अपने लड़के दोस्त पर जता सकता है और एक लड़की जितना अधिकार अपनी सहैली पर जता सकती है, उतना अधिकार लड़का-लड़की केवल गर्लफ्रैंड-बॉयफ
लड़के-लड़की की दोस्ती में लड़के की भावनाओं का अचार बनना तय होता है। इसलिए समझदार लड़के लड़की से दोस्ती करते ही नहीं है। समझदार लड़कों की दोस्ती का मकसद ही यहीं होता है, कि पहले दोस्ती करो, फिर गर्लफ्रैंड बनाओ। क्योंकि लड़की के पास दोस्त के लिए रटा-रटाये जवाब हमेशा तैयार रहते हैं।
"हम सिर्फ दोस्त है, ओके।"
"बॉयफ्रैंड बनने की कोशिश मत करो, समझे।"
"हे भगवान! तुम मेरे बारे में इतना क्यों सोचते हो ?"
"ओ माइ गॉड ! तुम दोस्त हो, दोस्त बनकर रहो।"
"हाय अल्लाह ! तुम ये क्यों भूल जाते हो, वो मेरा बॉयफ्रैंड है ?"
ये केवल कुछ नमूने है। लड़के-लड़की के दोस्ती में इस तरह के और इससे मिलते-जुलते कई डायलॉग लड़कों को लड़कियों से सुनने को मिलते हैं।
लड़की यह विचार नहीं करती कि दोस्त की बात सही है या गलत ? अच्छी है या बुरी ? दोस्त भला सोच रहा है या बुरा ? दोस्त का भी बात करने का, मिलने-जुलने का मन होता है ? लेकिन नहीं। लडकी की जीवन में बॉयफ्रैंड आने के बाद दोस्त, दोस्त की बातें और दोस्त की भावनाएँ सब गई भाड़ में। लड़की का सब कुछ उसका बॉयफ्रैंड हो जाता है।
यहाँ कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि सभी लड़के दुध के धुले हुए है। यह सही है कि कुछ लड़के गलत इरादे से लड़कियों के साथ दोस्ती करते हैं, लेकिन जिनके मन में कोई गलत इरादा नहीं होता, जो हमेशा आपकी खुशी के बारे में सोचते हैं। कभी आप भी उनके बारे में सोच लिया करो।
यकिन मानिए, जो लड़के सच्चे दिल से दोस्ती करते हैं, वो किसी को आपसे दूर नहीं करना चाहते। उनको आपके बॉयफ्रैंड या आपके पति से कोई प्रोब्लम नहीं है। आपको परेशान या उदास देखकर वो मायूस हो जाते हैं। आपको खुश होकर हँसते-मुस्कुरात
हाँ, लड़की से दोस्ती निभाते वहीं है, जिनके दिल और दिमाग में गन्दगी नहीं होती। लेकिन ये बात तो बॉयफ्रैंड और पति पर भी लागू होती है। जिनके इरादे गलत है, वो चाहे कोई भी रिश्ता बनाए, उनसे आपको तकलीफ ही मिलेगी।
अक्सर लड़कियाँ शादी होते ही सबसे पहले अपने लड़के दोस्तों को खुद से दूर करती है। लड़कियाँ ये भी नहीं सोचती, कि इससे उन दोस्तों के दिल पर क्या गुजरती है ? बॉयफ्रैंड लोग तो लड़की का चेहरा खराब करके या लड़की का मर्डर करके अपना प्यार दिखा देते हैं। क्योंकि बॉयफ्रैंड का मकसद आपकी खुशी नहीं, बल्कि खुद की खुशी होता है। बॉयफ्रैंड के लिए शादी के बाद भी कई लड़कियाँ रोती है। बॉयफ्रैंड के रिश्ते में फिजिकल रिलेशन की भावना भी होती है। इसलिए बॉयफ्रैंड का रिश्ता पति से छुपाना जरूरी है, लेकिन दोस्त का प्यार तो फिजिकल रिलेशन से बढ़कर होता है। फिर भी शादी होते ही सबसे पहले दोस्त को जीवन से बाहर करके दोस्त का दिल तोड़ दिया जाता है।
अगर लड़की ने किसी अच्छे इन्सान को दोस्त बनाया है, जिसके दिल में फिजिकल रिलेशन जैसी कोई भावना नही है। जो केवल लड़की की खुशी के बारे में सोचता है। उसे पति से छुपाने की क्या जरूरत है ? जो पति एक पुरुष होकर अपनी पत्नी के अच्छे पुरुष दोस्तों की भावनाओं को पहचान ना सकें, वो पत्नी की भावनाओं को कैसे समझेगा ? क्योंकि जो पत्नी धोखा देना चाहती है, वो अपने दोस्त को पति से क्यों मिलवाएगी ? और जिसके मन में खोट है, वो लड़की के पति से क्यों मिलेगा ? हाँ, कई लोग गलत इरादों से दोस्त बनते हैं, लेकिन पति-पत्नी में इतनी समझ तो होनी चाहिए कि वो अच्छे दोस्त और बुरे दोस्त की पहचान कर सकें। क्योंकि धोखा तो पति के दोस्त भी दे सकते हैं।
और हाँ,
और एक बात,
दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है, जिसे किसी भी रिश्ते में कन्वर्ट किया जा सकता है। नारी-पुरुष की मित्रता में आयु का अधिक अन्तर होने पर दोस्त माँ-बेटा या माँ-बेटी भी बन सकते हैं, बाप-बेटा या बाप-बेटी भी बन सकते हैं। जैसे समान आयु के दो दोस्त एक-दूसरे को भाई कह सकते हैं, दो सहैलियाँ एक-दूसरे को बहन कह सकती है, उसी तरह लड़का-लड़की दोस्ती में एक-दूसरे को भाई-बहन भी कह सकते हैं। वो कहें या ना कहें ? ये उनकी भावनाओं और इच्छा पर निर्भर करता है। लेकिन कोई यह सुनते ही असहज हो जाए, तो समझ जाओ, उसका असली इरादा दोस्ती की आड़ में कुछ और है। दोस्त एक-दूसरे को क्या कहते हैं ? यह उनकी आपसी सहमति की बात है, लेकिन जो सच्चे मन से दोस्ती करते हैं, वो हर बात में सहज रहते हैं।
दोस्ती के बाद गर्लफ्रैंड-बॉयफ
अतः दोस्त बनकर अपना स्वार्थ साधने वालों से बचकर रहिए और अपनी बुद्धि व विवेक से सोच-समझकर अच्छे लोगों से दोस्ती कीजिए। और दोस्ती करने के बाद दोस्त की भावनाओं का सम्मान भी कीजिए। किसी भी अच्छे दोस्त को बिना उचित कारण खुद से दूर ना करें। जो आपको सच्चे दिल से दोस्त मानते हैं, यदि उनके कारण आपको कोई प्रोब्लम होने की संभावना रहती है, तो सच्चे दोस्त खुद ही आपसे दूर हो जाएंगे। क्योंकि आपकी भलाई में ही सच्चे दोस्तों की खुशी होती है।
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06-10-2018, #वर्मन_गढ़वाल
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