पिछले कुछ दिन से सोशल साइट्स पर "जान मेरी जानेमन, बचपन का प्यार मेरा भूल नहीं जाना रे" गाना गाने वाले बच्चे सहदेव पर ढ़ेर सारे पोस्ट किये जा रहे हैं।
पहले मुझे लगा कि शायद कोई छोटा बच्चा गाना गाकर किसी लड़की को इम्प्रेस करने का प्रयास कर रहा था, इसलिए लोग इस बच्चे का मज़ाक उड़ा रहे हैं।
आज यूट्यूब पर मैंने इस बच्चे सहदेव का वीडियो देखा, तो मालूम हुआ कि ऐसा तो कुछ भी नहीं है। एक युवा या मध्यम आयु के मैच्योर व्यक्ति ने बच्चे को गाना गाने के लिए कहा और बच्चे के गाना गाने पर बच्चे का वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल हो गया, इसलिए बच्चा चर्चा में आ गया।
इस बच्चे पर कई तरह के कटाक्ष किये गये है।
विदेशी बच्चे गोल्ड मेडल जीतने की तैयारी करते है और भारतीय बच्चे गाने गाते है।
इस बच्चे की तरह अधिकांश लोग बचपन में भी अपनी पसन्द के गाने गुनगुनाते या गाते हैं, किशोरावस्था में भी में भी अपनी पसन्द के गाने गुनगुनाते या गाते हैं, युवावस्था में भी अपनी पसन्द के गाने गुनगुनाते या गाते हैं, मध्यम आयु अर्थात मिडिल एज के महिला-पुरुष भी अपनी पसन्द के गाने गुनगुनाते या गाते हैं और बुजुर्ग महिला-पुरुष भी अपनी पसन्द के गाने गुनगुनाते या गाते हैं।
जो लोग दब्बू स्वभाव के होते हैं, वो अकेले में अपनी पसन्द के गाने गुनगुनाते या गाते हैं और जो लोग खुले स्वभाव के होते हैं, वो लोग सबके सामने अपनी पसन्द के गाने गुनगुनाते या गाते हैं। कुछ वर्ष पहले एक डब्बू अंकल ने अपनी रिश्तेदारी में एक विवाह समारोह में नृत्य अर्थात डांस भी किया था और बहुत वायरल हुए थे।
ऑलंपिक में भाग लेने वाले अधिकांश खिलाड़ी भी बचपन से अपनी पसन्द के गाने गुनगुनाते या गाते रहे होंगे। विदेशी खिलाड़ी अपने-अपने देश के अपनी-अपनी पसन्द के गाने गुनगुनाते या गाते रहे होंगे और नीरज चोपड़ा सहित भारतीय खिलाड़ी अपनी पसन्द के भारतीय गाने गुनगुनाते या गाते रहे होंगे।
सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे महान क्रिकेटर भी अपनी पसन्द के गाने गुनगुनाते या गाते रहे होंगे। भारत के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेन्द्र सेहवाग तो कभी-कभी बल्लेबाजी करते हुए भी गाने गाया करते थे।
इन उदाहरण के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि इस बच्चे की तरह गाने तो बहुत लोग गुनगुनाते या गाते हैं। गाने में बुराई हो सकती है, गाने के बोल खराब हो सकते है, गाने के बोल आपत्तिजनक(चोली के पीछे क्या है ?, तू चीज़ बड़ी है मस्त-मस्त, इत्यादि घटिया बोल वाले) हो सकते है, लेकिन गाना गाने में अर्थात सिंगिंग में कोई बुराई नहीं है।
भारतीय बच्चे मोबाइल में टिक-टोक जैसे वीडियो बनाने में व्यस्त है।
शाहरुख खान की एक फिल्म "स्वदेश" है और एक फिल्म "डॉन" है। अगर हम कहें कि फिल्म बनाना ही गलत है, तो स्वदेश जैसी प्रेरणादायी फिल्में भी नहीं बन पाएँगी। इसी प्रकार रोक-टोक केवल अनुचित बातों पर लगानी चाहिए। अगर कोई बच्चा अच्छे वीडियो बनाता है, तो बच्चे का उचित मार्गदर्शन करके बच्चे को प्रोत्साहित करना चाहिए।
हमारे देश में मन्ना डे साहब, मुकेश, महेन्द्र कपूर, मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, पंकज उदास, उदित नारायण, कुमार सानू,कविता कृष्णमूर्ति, मोहम्मद अज़ीज, अल्का याज्ञिनी जैसे ढ़ेर सारे गायक-गायिका हुए है।
इन सभी गायक-गायिका ने युवा होने के बाद एकदम से गाना शुरू किया नहीं होगा ? ये सभी बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई और खेलकूद के साथ-साथ अपने गायन पर भी ध्यान देते रहे, तब जाकर गायन के क्षेत्र में सफल हुए।
अभी कल या परसो ही एक पोस्ट में पढ़ा था कि किशोर कुमार साहब को शुरुआती दिनों में नकार दिया गया था। फिल्म इंडस्ट्री वालों ने कहा कि किशोर कुमार को संगीत की समझ ही नहीं है, लेकिन फिर भी किशोर कुमार निरंतर प्रयास करते रहे और एक सफल गायक बने।
अब विचार करने वाली बात यह है कि मोहम्मद रफी, मन्ना डे, किशोर कुमार, लता मंगेशकर, पंकज उदास, उदित नारायण, कुमार सानू, अल्का याज्ञिनी जैसे गायक-गायिका को गाना गाने से रोककर जबरदस्ती ऑलंपिक में भेज दिया जाता, तो क्या ये लोग मेडल लेकर आते ? जिनकी रूचि गायक-गायिका बनने में है, उनको खेलकूद में भेजेंगे, तो वो लोग कैसे सफल होंगे ?
वीरेन्द्र सेहवाग को क्रिकेट खेलने से रोककर गायक बनने के लिए भेजा जाता, तो क्या वीरेन्द्र सेहवाग गायिकी में सफल होते ?
हाँ, गायक-गायिका स्वस्थ रहने और मनोरंजन के लिए खाली समय में अपनी-अपनी पसन्द के अनुसार खेल सकते हैं और खिलाड़ी खाली समय में या मन करने पर अपनी-अपनी पसन्द के गाने गुनगुना या गा सकते हैं।
अगर इस बच्चे को गायक बनने में रूचि है, तो मेहनत करके प्रयास करके गायक बन भी सकता है। वरना अन्य सभी लोगों की तरह गुनगुनाना या गाना तो है ही।
मैं व्यक्तिगत तौर पर यह नहीं कहूँगा कि ये बच्चा बहुत होनहार है। क्योंकि सभी लोग बचपन में कई तरह के सपने देखते रहते हैं। कभी किसी सीरियल में पुलिस ऑफिसर से प्रभावित होकर पुलिस ऑफिसर बनने के सपने देखते हैं, कभी फौजी से प्रभावित होकर फौज में जाने के सपने देखते हैं, कभी फिल्म स्टार बनने के सपने देखते हैं, कभी क्रिकेटर बनने के सपने देखते हैं। मैंने भी अपने बचपन में कई तरह के बड़े-बड़े सपने देखें है। आप सभी ने भी देखे होंगे। लेकिन बड़े होकर बच्चे क्या बनते है ? यह बच्चे के परिवेश, बच्चे की परवरिश, बच्चे के खुद के प्रयासों और बच्चे के जीवन की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
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09-08-2021, #वर्मन_गढ़वाल
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